100 percent free sex web chating sites

Rated 4.50/5 based on 661 customer reviews

इस कादियानी किताब से पहले आज तक किसी ने दावा नहीं किया था मुहम्मद के वेद, पुराण, धम्मपद आदि किताबो में होने का.कादियानों के लिए तो यह बिलकुल ठीक ही है.क्योंकि इसी प्रकार वे राम, कृष्ण, बुद्ध को भी पैगम्बर साबित करते हैं.हम जाकिर भाई से पूछना चाहते हैं कि उन्होंने अपने चाहने वाले एक सच्चे मुसलमान के लिए क्या रास्ता छोड़ा है?यही कि या तो जाकिर भाई की तरह कादियानियों के शुक्रगुजार हों और उनके कर्जदार हो जाएँ या फिर इस्लाम को दाग लगाने वाले जाकिर भाई से ही तौबा कर लें!

100 percent free sex web chating sites-70

100 percent free sex web chating sites-59

वे खुद इस बात को बड़े फख्र से पेश करते हैं कि वो इस्लाम और बाकी मजहबों के तालिब इ इल्म (विद्यार्थी) हैं.

फिर उसी तरह मुहम्मद और फिर मिर्ज़ा गुलाम को भी उसी पैगम्बरी परंपरा का दूत दिखाते हैं.

कादियानी फिरके के आलावा कोई और मुसलमान इस को नहीं मानता.

लफ्ज़ दर लफ्ज़ (शब्दशः) किसी की किताब से बिना पूछे चोरी करना और उसका शुक्रिया अदा करना तो दूर, उसका नाम भी नहीं लेना. एक कादियानी (काफिर) की बातों को मुसलमानों के बीच इस्लाम कह कर पेश करना यानी मुसलमानों को धोखा देना. और इस सारे काम की वाहवाही खुद लूटना जबकि यह किसी और का काम था और खुद को मजहबी मामलों का आलिम कहकर मुसलमानों को गुमराह करना. अपने चाहने वालों को कादियानियों के सामने जलील होने की वजह बनना. वेदों में मुहम्मद का दावा होने पर भी वेदों को इल्हामी ना मानना. बड़ी चालाकी से कादियानी सिद्धान्तों को मुसलमानों में चुप चाप बढ़ावा देना ताकि किसी को कोई शक न हो.इन सब बातों से इस बात का शक होता है कि कहीं जाकिर भाई मुसलमान के भेष में कादियानी तो नहीं?

क्योंकि कादियानियों को ऊपर से गलत कहकर सीधे साधे मुसलमानों की भीड़ जुटाकर जाकिर भाई जब कादियानी किताबों की खासमखास बातों को ही फैलाने में लगे हैं तो इसका और क्या मतलब निकलता है?

Leave a Reply